नई दिल्ली: भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) ने बुनियादी ढांचा विस्तार और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। वित्त मंत्रालय और भारी उद्योग विभाग द्वारा जारी ताजा समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, महारत्न और नवरत्न कंपनियों का समग्र पूंजीगत व्यय (Capex) पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 28 प्रतिशत बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
समीक्षा बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि ऊर्जा, तेल एवं प्राकृतिक गैस, इस्पात और रेलवे से जुड़े केंद्रीय उपक्रमों ने पूंजीगत परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन में अग्रणी भूमिका निभाई है। आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत स्वदेशी विनिर्माण और अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने पर विशेष बल दिया जा रहा है।
ऊर्जा संक्रमण और हरित हाइड्रोजन में भारी निवेश
सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख ऊर्जा कंपनियों ने गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों की दिशा में अपने निवेश को दोगुना कर दिया है। हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen) मिशन और ग्रिड सुदृढ़ीकरण से संबंधित अनुबंधों को तेजी से अंतिम रूप दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन पहलों से घरेलू औद्योगिक मांग में निरंतर वृद्धि बनी रहेगी।
मंत्रालय ने सभी सार्वजनिक उपक्रमों को निर्देश दिया है कि वे आगामी तिमाहियों में भी अपनी निवेश गति को बनाए रखें ताकि देश के आर्थिक विकास को नई मजबूती मिल सके।
